नई दिल्ली:- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, आज कच्चे तेल की कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखा गया और बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी कच्चा तेल (USWUTI) 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड में लगभग 1.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और शुरुआती कारोबार में यह 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की आशंकाओं से जुड़ी है।
आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भी इसी रास्ते से आता है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, यदि आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। इसका असर महंगाई दर पर भी पड़ सकता है, खासकर उन देशों में जो तेल आयात पर अधिक निर्भर हैं। भारत में भी तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर ईंधन दरों की समीक्षा कर सकती हैं।
इस बीच, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और तेल आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।