नई दिल्लीः- इजरायल और अमेरिका की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट के कई देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की इस कार्रवाई की अमेरिका समेत छह खाड़ी देशों ने कड़ी निंदा करते हुए इसे “खतरनाक बढ़ोत्तरी” करार दिया है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
संयुक्त बयान में हमलों की निंदाः-
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में संयुक्त राज्य अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों ने ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों पर किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की।
इस बयान में कहा गया, “हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से संप्रभु क्षेत्रों पर बिना सोचे-समझे और लापरवाही से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा करते हैं।”
कई देशों पर असरः-
संयुक्त बयान के अनुसार, इन हमलों का प्रभाव बहरीन, इराक (जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र शामिल है), जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा।
बयान में कहा गया कि इन हमलों ने संप्रभु इलाकों को निशाना बनाया, आम नागरिकों को खतरे में डाला और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। तेहरान की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन बताते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया गया।
सरकारों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने ऐसे देशों को निशाना बनाया जो सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल नहीं थे। इस साझा बयान में कहा गया कि, “आम लोगों और गैर-लड़ाकू देशों को टारगेट करना लापरवाही भरा और अस्थिर करने वाला व्यवहार है।”
सुरक्षा सहयोग पर जोरः-
सातों देशों ने अपने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने तथा मिलकर जवाब देने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि वे अपने नागरिकों, संप्रभुता और क्षेत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं और आत्मरक्षा के अधिकार को पुनः पुष्ट करते हैं।
इसके साथ ही क्षेत्र में संयुक्त एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग की सराहना की गई, जिसके कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सका।
बदलता सुरक्षा संतुलन यह संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले संघर्ष का प्रमुख हिस्सा बन गए हैं। हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पश्चिमी और खाड़ी देशों के अधिकारियों का मानना है कि इससे क्षेत्र का सुरक्षा संतुलन प्रभावित हुआ है।
हालांकि, तेहरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका के खाड़ी देशों में सैन्य अड्डे मौजूद हैं और बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब तथा यूएई के साथ उसकी दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी है। क्षेत्रीय एयर डिफेंस इंटीग्रेशन, ईरान और उसके सहयोगी समूहों से उत्पन्न मिसाइल और ड्रोन खतरों का मुकाबला करने की अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है।