नई दिल्ली, 18 Apr, (Political Insight): संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर शुक्रवार को तीखी बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, लेकिन मौजूदा बिल की मंशा और प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां हैं।
सदन में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा,
“हमारी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है। हमने कभी इसका विरोध नहीं किया, बल्कि उन लोगों को रोका जो महिलाओं के अधिकार छीनना चाहते थे।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रही है, लेकिन इस बिल में सामाजिक न्याय के महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।
“हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन हम जातीय जनगणना चाहते हैं। सरकार स्पष्ट करे कि क्या OBC महिलाओं को इसमें शामिल किया जाएगा या नहीं,” उन्होंने सवाल उठाया।
अखिलेश यादव ने कहा कि बिना अद्यतन और व्यापक जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भरता को भी गलत बताते हुए कहा कि इससे आरक्षण की बुनियाद कमजोर हो सकती है।
सपा प्रमुख ने सरकार पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम बिल के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उसके उस तरीके के खिलाफ हैं जिसकी मंशा संदिग्ध है। अगर नीयत साफ होती तो शंका नहीं होती।”
अखिलेश यादव ने दावा किया कि मौजूदा स्वरूप में यह बिल समाज के बड़े वर्ग – पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के हितों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे महिलाओं के बीच असमानता बढ़ने का खतरा है।
बहस के दौरान उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र कन्नौज का एक अनुभव साझा करते हुए कहा,
“मैं एक मंदिर गया था, मेरे जाने के बाद उसे गंगाजल से धुलवाया गया। यह क्यों हुआ, इस पर देश को सोचने की जरूरत है।” उन्होंने इसे समाज में मौजूद भेदभाव की मानसिकता से जोड़ा।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर आरक्षण एक-तिहाई सीटों के आधार पर दिया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सभी वर्गों की महिलाओं को उसका समान लाभ मिले।
उनके अनुसार, गलत आंकड़ों और अधूरी प्रक्रिया के आधार पर लागू किया गया आरक्षण अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाएगा।