नई दिल्ली, May 21, (Political Insight) : मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत के बयान से मचे बवाल के बाद बनी “कॉकरोच जनता पार्टी” का एक्स अकाउंट भारत में बैन कर दिया गया है। हालांकि, इसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से की थी। बवाल बढ़ने पर उन्होंने सफाई भी दी। इसके बाद “कॉकरोच जनता पार्टी” शुरू की गई। वहीं, सोशल मीडिया पर इस पार्टी के देखते ही देखते लाखों फॉलोअर्स हो गए।
हालांकि, इस पार्टी के एक्स अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया है, लेकिन पार्टी का इंस्टाग्राम पेज अब भी दिखाई दे रहा है। मजाक-मजाक में शुरू हुई इस पार्टी ने फॉलोअर्स के मामले में देश की सबसे बड़ी पार्टी BJP को भी पीछे छोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार, पार्टी के इंस्टाग्राम पर एक करोड़ फॉलोअर्स हो गए हैं, जबकि BJP के 87 लाख फॉलोअर्स ही हैं। वहीं, CJI के बयान के विरोध में बनी इस पार्टी को विपक्ष के नेताओं का भी खूब समर्थन मिला।
फाउंडर ने जताया विरोध
भारत में “कॉकरोच जनता पार्टी” के एक्स अकाउंट के बैन होने के बाद इसके फाउंडर अभिजीत दीपके भड़क उठे। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “जिस बात का डर था, वही हुआ। पहले उन्होंने हमारे अकाउंट को बैन करने की कोशिश की। जब वह नहीं हुआ, तो हमारे एक्स के ऑफिशियल अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया।”
अभिजीत ने युवाओं से सवाल उठाने की अपील करते हुए कहा, “आप सब इसके लिए जवाब मांगिए कि ऐसा क्यों किया गया। हमने ऐसा क्या दिखा दिया कि हमारे अकाउंट को बैन कर दिया गया? हमने तो सिर्फ सरकार से अकाउंटेबिलिटी मांगी थी और हमारे अकाउंट को डी-एक्टिवेट कर दिया गया।”
क्या था मामला
यह मामला तब शुरू हुआ, जब CJI ने बेरोजगार युवाओं को लेकर टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था कि, “कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें जब कोई रोजगार या प्रोफेशन में जगह नहीं मिलती, तो वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI एक्टिविस्ट या अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सिस्टम पर हमला करना शुरू कर देते हैं।” बयान सुर्खियों में आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी गई। हालांकि, अगले दिन CJI ने बयान जारी कर कहा कि उनका यह बयान सिर्फ फर्जी डिग्रीधारकों के लिए था और उनका इरादा युवाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
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