भगवंत मान ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, ‘आप’ सांसदों के कथित विलय को बताया असंवैधानिक, रीकॉल की मांग

भगवंत मान ने राष्ट्रपति से की मुलाकात, ‘आप’ सांसदों के कथित विलय को बताया असंवैधानिक, रीकॉल की मांग

नई दिल्ली, May 6, (Political Insight) : आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में कथित विलय का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। इस मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इन सांसदों के कदम को असंवैधानिक बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने तर्क दिया कि इन सांसदों ने पार्टी छोड़कर जनता के भरोसे के साथ धोखा किया है, इसलिए उनकी सदस्यता तत्काल समाप्त की जानी चाहिए। मान ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया। भगवंत मान के साथ पहुंचे विधायकों ने भी पार्टी छोड़कर गए सांसदों की वापसी की मांग उठाई।

राष्ट्रपति से मुलाकात और संविधान पर सवाल

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सभी सात राज्यसभा सांसदों के कथित पार्टी परिवर्तन के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सभी सांसदों ने बिना संवैधानिक प्रक्रिया अपनाए खुद को दूसरी पार्टी का हिस्सा घोषित कर दिया, जो लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। मान ने कहा कि किसी भी दल का विलय केवल दो-तिहाई बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद ही वैध माना जा सकता है, न कि व्यक्तिगत स्तर पर सांसदों के निर्णय से।

लोकतंत्र की हत्या’ और मेंडेट पर सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि यह जनता के जनादेश का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही सदन के कुछ सांसद अपने मन से यह कैसे तय कर सकते हैं कि वे अब किसी अन्य पार्टी का हिस्सा हैं। मान ने यह भी कहा कि जिन प्रतिनिधियों को जनता ने चुना है, वे यदि बिना इस्तीफा दिए दल बदलते हैं, तो यह सीधे तौर पर जनादेश के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रीकॉल प्रावधान और सख्त कार्रवाई की मांग

भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर 95 विधायकों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज सौंपा। साथ ही उन्होंने संविधान में रीकॉल प्रावधान शामिल करने की मांग उठाई, ताकि यदि कोई जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं पर खरा न उतरे तो उसे वापस बुलाया जा सके। उन्होंने कहा कि जनता के वोट से चुने गए प्रतिनिधियों को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग भी की, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मर्यादा बनी रहे।

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