पश्चिम एशिया संकट पर सदन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का बयान

पश्चिम एशिया संकट पर सदन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का बयान

नई दिल्ली:- पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि PM मोदी क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए मौजूदा संघर्ष भारत के लिए चिंता का विषय है। सरकार की प्राथमिकता वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाना है।

विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि ताजा हालात को देखते हुए संघर्ष प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए विशेष अभियान तेज कर दिया गया है। भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास कर रही हैं।

हमलों के बाद बढ़ा क्षेत्रीय तनावः-

सदन में बयान देते हुए डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हाल के हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ है और कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौत की भी खबरें सामने आई हैं। इससे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

भारत ने संयम और कूटनीति पर दिया जोरः-

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने 28 फरवरी को आधिकारिक बयान जारी कर हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने तथा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की गई थी। भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।

कैबिनेट सुरक्षा समिति में हुई समीक्षाः-

उन्होंने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को PM मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक भी हुई। इस बैठक में क्षेत्र में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में बढ़े तनाव पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर की भी समीक्षा की।

उन्होने बताया कि उस बैठक में उन भारतीय यात्रियों और छात्रों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई, जो इन देशों में यात्रा कर रहे हैं या परीक्षाओं में शामिल होने वाले हैं। इसके बाद संबंधित मंत्रालयों और विभागों को स्थिति से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि भारत शांति, संयम और बातचीत के जरिए इस संघर्ष को समाप्त करने की अपील करता है।

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