नई दिल्ली:- इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारतीय सेना की पशु टुकड़ी पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करती नजर आएगी। यह टुकड़ी देश के कुछ सबसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण इलाकों में सैन्य अभियानों के दौरान जानवरों की अहम भूमिका को प्रदर्शित करेगी। सेना के अनुसार, यह कदम भारतीय सेना की परंपरा, परिचालन क्षमता और आत्मनिर्भरता को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सेना की इस विशेष टुकड़ी में दो बैक्ट्रियन ऊंट, चार ज़ांस्कर नस्ल के खच्चर, चार शिकारी पक्षी, 10 भारतीय नस्ल के श्वान(Dog) और वर्तमान में सेवा में कार्यरत छह पारंपरिक सैन्य श्वान शामिल होंगे। इन श्वानों को भारतीय सेना में उनके अद्वितीय योगदान के कारण अक्सर “मौन योद्धा” कहा जाता है।
सेना अधिकारियों के मुताबिक, यह टुकड़ी अपने परिचालन ढांचे में परंपरा, नवाचार और स्वदेशी संसाधनों के संतुलित उपयोग को दर्शाती है। परेड के दौरान टुकड़ी का नेतृत्व बैक्ट्रियन ऊंट करेंगे, जिन्हें हाल ही में लद्दाख के अत्यधिक ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए शामिल किया गया है। अपनी सहनशक्ति और ऊंचाई पर कार्य करने की क्षमता के कारण ये ऊंट सीमावर्ती क्षेत्रों में रसद और उपकरणों की ढुलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ज़ांस्कर खच्चर और शिकारी पक्षी पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सेना के अभियानों को सहयोग प्रदान करते हैं, जहां आधुनिक वाहन और तकनीक की पहुंच सीमित होती है। वहीं, सैन्य श्वान आतंकवाद-रोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों का पता लगाने, वीआईपी सुरक्षा, आपदा प्रबंधन तथा खोज और बचाव अभियानों में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं।
मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) सेंटर और कॉलेज में प्रशिक्षित ये श्वान कठोर परिस्थितियों में काम करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। सेना के अनुसार, पशु टुकड़ी की परेड में भागीदारी न केवल उनके योगदान के प्रति सम्मान है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अत्याधुनिक तकनीक के दौर में भी पशु शक्ति भारतीय सेना की परिचालन क्षमता का एक अहम हिस्सा बनी हुई है।
गणतंत्र दिवस परेड में इस अनूठी प्रस्तुति के जरिए सेना देशवासियों को अपने उन “मौन योद्धाओं” से रूबरू कराएगी, जो हर परिस्थिति में राष्ट्र की सेवा में तैनात रहते हैं।