SCO समिट 2025: भारत-चीन-रूस संबंधों के लिए क्या मायने रखता है यह मंच?

SCO समिट 2025: भारत-चीन-रूस संबंधों के लिए क्या मायने रखता है यह मंच?

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट 2025 एक बार फिर से क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों के केंद्र में आ गया है। भारत, चीन और रूस – तीनों प्रमुख सदस्य देशों की भागीदारी इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक में तनाव, और वैश्विक बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ते कदमों के बीच, यह शिखर सम्मेलन न केवल क्षेत्रीय सहयोग का मंच है बल्कि इन तीन शक्तिशाली देशों के बीच रणनीतिक संवाद और संतुलन साधने का एक अवसर भी है।

1. भारत के लिए SCO: सामरिक संतुलन का मंच

भारत SCO का उपयोग एक “स्ट्रैटेजिक बैलेंसर” के रूप में करता रहा है। पश्चिम (विशेषकर अमेरिका और यूरोप) के साथ गहरे होते संबंधों के बीच, भारत SCO के माध्यम से रूस और चीन जैसे शक्तियों से संवाद बनाए रखने की कोशिश करता है। यह मंच भारत को मल्टी-एलायंस डिप्लोमैसी को साधने में मदद करता है।

भारत के लिए यह भी जरूरी है कि वह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया में चीन-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी को संतुलित कर सके। SCO इसमें भूमिका निभा सकता है।

2. चीन की रणनीति: प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाना

चीन SCO को अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को बढ़ावा देने वाले मंच के रूप में देखता है। हालांकि भारत BRI का विरोध करता है, लेकिन चीन इस मंच के ज़रिए राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव क्षेत्र को मध्य एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक विस्तार देना चाहता है।
इसके अतिरिक्त, चीन भारत के साथ सीमाई तनावों के बावजूद SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर संबंधों को “प्रबंधित” करने की नीति अपनाता है।

3. रूस की भूमिका: एशिया में नई धुरी की तलाश

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों ने उसे एशिया की ओर और अधिक झुका दिया है। SCO के ज़रिए रूस, भारत और चीन दोनों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखने की कोशिश करता है। भारत के साथ पारंपरिक रक्षा सहयोग और चीन के साथ वर्तमान ऊर्जा सहयोग – दोनों को रूस इस मंच पर एक साथ साधने की कोशिश करता है।

4. तीनों देशों के लिए साझा चिंता: पश्चिमी प्रभाव और आतंकवाद

SCO समिट में आतंकवाद, कट्टरपंथ और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दे प्रमुख एजेंडे में रहे हैं। भारत, चीन और रूस – तीनों ही इन साझा खतरों को लेकर सजग हैं और इनके खिलाफ समन्वय बनाने की जरूरत पर सहमत हैं, भले ही उनके द्विपक्षीय संबंधों में तनाव क्यों न हो।

SCO समिट भारत, चीन और रूस के लिए एक रणनीतिक मंच है जहां वे आपसी मतभेदों के बावजूद सहयोग के बिंदुओं को तलाश सकते हैं। यह संगठन उन देशों के लिए खास मायने रखता है जो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के पक्षधर हैं और पश्चिमी वर्चस्व को संतुलित करना चाहते हैं। हालांकि, सीमित उपलब्धियों और परस्पर अविश्वास के चलते SCO की भूमिका अब भी एक “डायलॉग टेबल” तक सीमित नजर आती है – लेकिन इसी संवाद की निरंतरता इन तीनों देशों के लिए दीर्घकालिक स्थिरता की कुंजी हो सकती है।

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