PM मोदी शुक्रवार को 2 दिन के जापान दौरे पर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने टोक्यो में आयोजित 15वें भारत-जापान समिट में हिस्सा लिया। मोदी की जापान यात्रा ने भारत और जापान के बीच मौजूदा मजबूत संबंधों को और मज़बूत किया है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है.
इस रोडमैप में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य शामिल है, जिसमें छोटे और मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा प्रधानमंत्री ने जापान के बिजनेस लीडर्स को बताया कि कैसे जापान की टेक्नॉलजी और भारत के टैलेंट आपस में मिलकर दोनों के विकास में अहम रोल अदा कर सकते हैं.।
मोदी ने अगले भारत-जापान समिट के लिए इशिबा को भारत आने का न्योता दिया। इसके अलावा मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग पर भारत के रुख को साफ करते हुए इसे मानवता के आधार पर देखने की बात कही। साथ ही इस सम्मिट में प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों में), और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी. मानव संसाधन आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य योजना भी बनाई गई है.
भारत और जापान ने एक मुक्त, खुले, शांतिपूर्ण, और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.। रवाना होने से पहले सोशल मीडिया पर लिखा कि इस दौरे का मकसद भारत और जापान के बीच खास रणनीतिक और ग्लोबल साझेदारी को मजबूत करना है। बतौर प्रधानमंत्री यह मोदी की 8वीं जापान यात्रा है। स्थानीय कलाकारों ने टोक्यो के होटल में उनका गायत्री मंत्र से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने प्रवासी भारतीयों से भी मुलाकात की। जापान के बाद मोदी 31 अगस्त को चीन पहुंचेंगे।