निकोबार प्रोजेक्ट पर सियासत तेज, राहुल गांधी ने केंद्र पर लगाए बड़े आरोप

निकोबार प्रोजेक्ट पर सियासत तेज, राहुल गांधी ने केंद्र पर लगाए बड़े आरोप

नई दिल्ली, May 20, (Political Insight) : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपने समर्थक इकोसिस्टम के जरिए ऐसा माहौल बना रही है, जिसमें इस परियोजना से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर सवाल उठाने वालों को “चीन समर्थक” बताने की कोशिश की जा रही है।

सरकार चीन को लेकर अपनाती है ‘4C नीति’ : राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार चीन के प्रति “4C नीति” अपनाती रही है। उन्होंने कहा कि यह “हिपोक्रेसी की हद” है। राहुल के अनुसार, 4C का मतलब Continuing, Calibrated Capitulation to China यानी “चीन के प्रति निरंतर और सुनियोजित समर्पण” की नीति है।

मोदी सरकार ने चीन को दी क्लीन चिट’

राहुल गांधी ने दावा किया कि 19 जून 2020 को PM नरेंद्र मोदी ने चीन को एक तरह से “क्लीन चिट” दे दी थी, जो लद्दाख में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों का अपमान था। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के साथ बातचीत के दौरान सरकार ने लद्दाख के कई इलाकों में पारंपरिक गश्त और पशुओं को चराने के अधिकारों छोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर करीब 115 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसका सबसे अधिक असर भारतीय उद्योगों, खासकर MSME सेक्टर, पर पड़ा है।

ऑपरेशन सिंदूर’ में चीन की भूमिका पर भी उठाए सवाल

राहुल गांधी ने कहा कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की रणनीतिक गतिविधियों में चीन की कथित भूमिका को लेकर सैन्य अधिकारियों के खुलासों पर भी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि भारत को चीन की आर्थिक व रणनीतिक चुनौतियों का कई मोर्चों पर सामना करना पड़ रहा है, लेकिन ग्रेट निकोबार आइलैंड प्रोजेक्ट मुख्य रूप से एक व्यावसायिक परियोजना है। राहुल ने आरोप लगाया कि इसके ट्रांसशिपमेंट पोर्ट में किसी सैन्य ढांचे का तत्व नहीं है, जबकि आईएनएस बाज और अंडमान-निकोबार कमांड के अन्य सैन्य ठिकानों के विस्तार के सुझाव लंबे समय से लंबित पड़े हैं। राहुल ने यह भी दावा किया कि यह परियोजना बड़े कारोबारी हितों से जुड़ी हो सकती है और इसके कारण पर्यावरण तथा स्थानीय समुदायों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। बता दें कि राहुल ने 28 अप्रैल 2026 को पहली बार ग्रेट निकोबार द्वीप का आधिकारिक दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ग्रेट निकोबार होलिस्टिक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ का कड़ा विरोध किया।

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