नई दिल्ली:- लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के प्रस्ताव पर आज फिर चर्चा शुरू होगी। बुधवार को सदन में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस की संभावना है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था और आरोप लगाया था कि सदन के संचालन में निष्पक्षता नहीं बरती गई।
डॉ. जावेद ने कहा कि अध्यक्ष ने कई मौकों पर विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने से रोका और सदन में विपक्षी महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाए। उनका आरोप था कि सदन के संचालन में निष्पक्षता बनाए रखने में अध्यक्ष विफल रहे, जिससे लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचा है।
वहीं, सरकार ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन का संचालन पूरी तरह निष्पक्षता और नियमों के अनुसार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष राजनीतिक हित साधने के लिए इस तरह का प्रस्ताव ला रहा है।
बहस के दौरान शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने भी प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही में बाधा डालता रहा है और अब उसी का दोष अध्यक्ष पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है।
आपको बता दे कि कांग्रेस की ओर से सांसद गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को कई बार बोलने से रोका गया। उनके अनुसार, यह सदन की स्वस्थ संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने प्रस्ताव के समर्थन में अपनी बात रखी। हालांकि, लंबी चर्चा के बाद भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका और बहस अधूरी रह गई, जिसे आज आगे बढ़ाया जाएगा।
संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है और उसके बाद मतदान कराया जाता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होती है।
उधर, राज्यसभा में आज ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा जारी रहेगी, जिसमें ग्रामीण योजनाओं, रोजगार सृजन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों पर सदस्यों के विचार रखे जाने की संभावना है।