नई दिल्लीः– केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजिजू ने द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान पैदा हुए विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त किया जाना न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश की पहली जनजातीय राष्ट्रपति को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े, यह बेहद दुखद है।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे है और यह राष्ट्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है। देश की पहली जनजातीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की ओर से इस तरह की पीड़ा व्यक्त किया जाना पूरे देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
इससे पहले रिजिजू ने राष्ट्रपति मुर्मु के संबोधन का वीडियो साझा करते हुए ममता बनर्जी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा था। उन्होंने लिखा कि एक आदिवासी महिला, जो देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं, उनका अपमान करना आदिवासी गौरव और भारत के संविधान दोनों का अपमान है।
दरअसल, यह विवाद राष्ट्रपति मुर्मु के दार्जिलिंग जिले के दौरे के दौरान सामने आया। वह यहां अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं। राष्ट्रपति को मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेना था, लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी। इसके बाद कार्यक्रम को गोशाईपुर के एक छोटे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
राष्ट्रपति मुर्मु जब फांसीदेवा क्षेत्र में पहुंचीं तो उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल बदलने के कारण कई संथाल समुदाय के लोग सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि यदि सम्मेलन पहले तय स्थान पर होता तो अधिक लोग इसमें शामिल हो सकते थे।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए ऐसी जगह क्यों चुनी जहां संथाल समुदाय के लोगों के लिए पहुंचना कठिन था। उन्होंने कहा कि शायद प्रशासन को उम्मीद थी कि कार्यक्रम में बहुत कम लोग आएंगे।
इसके साथ ही राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रोटोकॉल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं तो आमतौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री स्वागत के लिए मौजूद रहता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
राष्ट्रपति ने कहा, “मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी मेरी बहन की तरह हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज थीं, इसलिए ऐसा हुआ।”
इस घटनाक्रम को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और एक बार फिर केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।