नई दिल्ली:- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाला मामले में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और के कविता समेत कुल 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
CBI का आरोप है कि निचली अदालत ने जांच के दौरान जुटाए गए कई अहम साक्ष्यों और गवाहियों पर समुचित विचार नहीं किया। एजेंसी ने अपनी अपील में कहा है कि मामले में वित्तीय लेन-देन, कथित कमीशन व्यवस्था और नीति निर्माण में अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच और न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2021 में नई आबकारी नीति लागू की थी। नीति का उद्देश्य शराब बिक्री प्रणाली में सुधार, राजस्व बढ़ाने और निजी भागीदारी को बढ़ावा देना बताया गया था। हालांकि, इसके लागू होने के बाद विपक्षी दलों और उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।
गौरतलब है कि इन आरोपों के बीच, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की थी। बाद में दिल्ली सरकार ने इस नीति को वापस ले लिया।
आगे क्या ?
अब हाईकोर्ट में CBI की याचिका पर सुनवाई होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या मामले की दोबारा सुनवाई या पुनर्विचार का आदेश दिया जाएगा। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें देश की राजधानी की सत्तारूढ़ पार्टी के शीर्ष नेताओं के नाम शामिल हैं।
मामले पर सभी पक्षों की नजरें अब उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।