उत्तर प्रदेशः- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिग बटुकों के साथ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
मेडिकल रिपोर्ट बनी अहम कड़ीः-
पुलिस ने बुधवार को दोनों नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराया था। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि मेडिकल रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि हुई है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती है।
गिरफ्तारी की आशंका, हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाः-
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है। पुलिस किसी भी समय गिरफ्तारी की कार्रवाई कर सकती है। इस बीच स्वामी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है। इस पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में सुनवाई होनी है। यदि अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकती है।
आपको बता दे कि यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। ADJ (रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। केस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। जांच के दौरान कुछ अन्य नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है।
शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने माघ मेले के दौरान स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि दो बटुकों के साथ यौन शोषण हुआ। इस संबंध में उन्होंने जिला अदालत में आवेदन दायर किया था, जिसके बाद कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया।
पीड़ितों का बयानः-
इस मामले में पीड़ित बटुकों ने एक मीडिया ऐजेंसी से अपनी बातचीत में भी अपने आरोप दोहराए हैं। उनका कहना है कि गुरु दीक्षा के नाम पर उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पहले अन्य लोगों के सामने पेश किया जाता और फिर आपत्तिजनक कृत्य किए जाते थे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्षः-
वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा है कि वे जांच में सहयोग करेंगे, लेकिन उन्हें राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच किसी अन्य राज्य की एजेंसी से कराई जाए। उनका कहना है कि जब कोई बच्चा उनके पास आया ही नहीं, तो आरोप कैसे सही हो सकते हैं।
माघ मेले से शुरू हुआ विवादः-
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर प्रशासन और संत पक्ष के बीच हुए मतभेद के बाद सामने आया। इसके कुछ दिन बाद शिकायत दर्ज कराई गई। मामला हाई-प्रोफाइल होने के कारण पुलिस सावधानीपूर्वक जांच कर रही है।
मेडिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद जांच को नया मोड़ मिला है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई और पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है। फिलहाल, आरोप और प्रत्यारोप के बीच सच्चाई का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।