इंफाल:- मणिपुर में करीब एक साल बाद राष्ट्रपति शासन समाप्त हो गया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद वह राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने हैं।
आपको बता दे कि शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले 13 फरवरी 2025 को लागू राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। युमनाम खेमचंद सिंह ने BJP के ही नेता नोंग्थोम्बम बिरेन सिंह की जगह ली है, जिन्होंने मेइतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा के चलते 9 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यह हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी, जिसके बाद से राज्य में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता बनी रही।
इस नई सरकार में मणिपुर की सामाजिक और जातीय विविधता को दर्शाने के लिए दो उपमुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया गया है। कांगपोकपी विधानसभा सीट से BJP के विधायक नेमचा किपगेन, जो कुकी-ज़ो समुदाय से आती हैं, और नागा पीपल्स फ्रंट (NPAF) के विधायक लोसी डिखो, जो माओ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नागा नेता हैं, ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
आपको बता दे कि नेमचा किपगेन ने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल माध्यम से शपथ ग्रहण किया।
BJP सूत्रों के अनुसार, यह नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता संरचना राज्य में संतुलन बनाने तथा विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा बहाल करने की रणनीति का हिस्सा है। मणिपुर विधानसभा में भाजपा गठबंधन के पास बहुमत है, जिसमें भाजपा के साथ एनपीएफ और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं।
शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि उनकी सरकार मणिपुर की सामाजिक विविधता को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने बताया कि राज्य में 36 समुदाय निवास करते हैं और दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति का उद्देश्य प्रमुख समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने, आपसी विश्वास को मजबूत करने और समावेशी व संवेदनशील शासन सुनिश्चित करने पर फोकस करेगी।
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