बिहार, June 5, (Political Insight) : बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें आठ सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव और एक उपचुनाव शामिल है। नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून है, जबकि मतदान 18 जून को होगा।
एनडीए ने उम्मीदवारों के चयन में महिलाओं और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को विशेष प्राथमिकता दी है। घोषित नौ उम्मीदवारों में से पांच अति पिछड़ा समाज से आते हैं, जबकि दो महिलाएं हैं। इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा ने भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह को भी विधान परिषद भेजने का फैसला किया है। राजनीतिक गलियारों में इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री राजकुमार सिंह के असंतोष को संतुलित करने और पवन सिंह को एनडीए के साथ मजबूती से जोड़ने की कोशिश माना जा रहा है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।
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भाजपा ने चार उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें संजय मयूख के अलावा तीन नए चेहरे शामिल हैं। पार्टी ने पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है। अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
वहीं, जदयू के हिस्से में तीन सीटें और एक उपचुनाव की सीट आई है। पार्टी ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत, जदयू महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. भारती मेहता, पश्चिम चंपारण की शिवरानी देवी प्रजापति और उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। इनमें तीन उम्मीदवार अति पिछड़ा समाज से हैं, जबकि निशांत पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
डॉ. भारती मेहता मधुबनी जिले के बाबूबरही की निवासी हैं। उन्होंने पटना वीमेंस कॉलेज से स्नातक और दिल्ली के मिरांडा हाउस में अध्ययन किया है। इसके अलावा पटना विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की है। वह जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य रह चुकी हैं और वर्तमान में महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं।
ललन प्रसाद लंबे समय से जदयू संगठन से जुड़े रहे हैं। पिछली बार भी उन्हें विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजद नेता सुनील सिंह की सदस्यता बहाल किए जाने के बाद उनका एमएलसी बनने का सपना अधूरा रह गया था।
जदयू की सूची में शामिल भारती मेहता (नोनिया), शिवरानी देवी प्रजापति (कुम्हार) और ललन प्रसाद (धानुक) अति पिछड़ा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे साफ है कि एनडीए ने इस चुनाव में सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।