कोलकाता, June 9, (Political Insight): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी में पहले विधायकों की नाराजगी चर्चा में थी, अब कुछ सांसदों ने भी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। TMC सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि पार्टी के 20 सांसदों ने अलग होकर NDA का समर्थन करने का फैसला किया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा गया है।
काकोली घोष ने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से ममता बनर्जी के साथ जुड़ी रही हैं और उनका संघर्ष सत्ता मिलने के बाद शुरू नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मेरा सिर कट जाएगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैं तब भी ममता बनर्जी के साथ थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। मैंने कई चुनाव लड़े और हार का सामना किया, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ी।”
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन-चार वर्षों में राज्य में विकास की रफ्तार अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही। उनके मुताबिक शिक्षा, स्वास्थ्य और फिल्म उद्योग जैसे कई क्षेत्रों में स्थिति खराब हुई है। साथ ही वित्तीय अनियमितताओं और कानून-व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। काकोली ने कहा कि सरकारी अधिकारियों पर कुछ नेताओं के दबाव में काम करने की प्रवृत्ति बढ़ी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
TMC सांसद ने कहा कि जनता के हालिया जनादेश ने भी इन समस्याओं को उजागर किया है। उन्होंने बताया कि 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है ताकि वे पश्चिम बंगाल के विकास, राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा के मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से काम कर सकें।
काकोली घोष ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं देशभर में लागू हुईं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वे इन योजनाओं का लाभ अपने मतदाताओं तक पहुंचाना चाहते हैं।
ममता बनर्जी से संपर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से उनसे किसी ने संपर्क नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खराब नतीजों की जिम्मेदारी लेने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया और पार्टी में अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा।