बेंगलुरु, June 8, (Political Insight): कर्नाटक से 2026 के राज्यसभा चुनाव के लिए BJP द्वारा प्रोफेसर एम. नागराजू को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के इस कदम को कई राजनीतिक के जानकार चौंकाने वाला मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा टिकट की दौड़ में कई बड़े नाम शामिल थे। भाजपा के फैसले से सहयोगी दल JDS और उसके प्रमुख नेता पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
JDS को उम्मीद थी कि वर्तमान राज्यसभा सदस्य और पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल देवेगौड़ा को एक और कार्यकाल दिया जाएगा। हालांकि BJP ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया, जिससे गठबंधन के भीतर असंतोष और संभावित मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह फैसला BJP-JDS संबंधों पर असर डाल सकता है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने देवेगौड़ा के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए उनकी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को ध्यान में रखा। हालांकि पार्टी की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इसके बावजूद जेडीएस समर्थकों के बीच निराशा देखी जा रही है।
वहीं, पूर्व सांसद सुमालथा अंबरीश को भी टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी की चर्चा है। सुमालथा लंबे समय से राज्यसभा टिकट की दावेदार मानी जा रही थीं और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी दावेदारी भी रखी थी। लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन के हित में अपनी राजनीतिक स्थिति को पीछे रखने के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिलने से राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल था, लेकिन पार्टी ने उन्हें भी नजरअंदाज किया। इससे पार्टी के भीतर कुछ वर्गों में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। भाजपा के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जेडीएस, सुमालथा और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता इस निर्णय पर आगे क्या रुख अपनाते हैं और इसका गठबंधन की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।