नई दिल्ली, 10 जून (Political Insight): मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मामले में बुधवार को कांग्रेस ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया। पार्टी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को पूरी तरह गैरकानूनी, मनमाना और कानून के विपरीत बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष विस्तृत प्रस्तुतीकरण देकर यह दिखाया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश कानून और तथ्यों दोनों के विपरीत है।
मीडिया से बातचीत में सिंघवी ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो तथा जिन मामलों में सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों। उन्होंने कहा कि आरोप तय करना पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया है और यह कार्य केवल अदालत द्वारा किया जाता है।
सिंघवी ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन को संबंधित मामले में केवल एक नोटिस प्राप्त हुआ था, जिसमें उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि मामले में संज्ञान क्यों न लिया जाए। उनके अनुसार, इस स्तर पर अदालत ने अभी तक मामले में संज्ञान नहीं लिया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसे में नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई मामला लंबित नहीं था, जिसका खुलासा नामांकन पत्र में किया जाना आवश्यक हो। उन्होंने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने कानूनी स्थिति की अनदेखी करते हुए नामांकन रद्द कर दिया, जो कानून के अनुरूप नहीं है।
सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग को यह भी अवगत कराया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग के पास व्यापक संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकार हैं, जिनका उपयोग करते हुए वह इस फैसले की समीक्षा कर सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व निष्पक्ष और समान अवसर वाला चुनावी माहौल सुनिश्चित करना है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग शीघ्र हस्तक्षेप कर इस आदेश पर उचित निर्णय लेगा। सिंघवी ने कहा कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि होने के बावजूद अभी पर्याप्त समय उपलब्ध है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग को जल्द फैसला करना चाहिए।