भारत की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक नेतृत्व विश्व को प्रेरित कर रहे हैं : उपराष्ट्रपति

भारत की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक नेतृत्व विश्व को प्रेरित कर रहे हैं : उपराष्ट्रपति

बेंगलुरु, May 30 (Political Insight) : बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के 45 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित वैश्विक समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने संगठन के शांति, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता के कार्यों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पिछले चार दशकों में दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि इस संगठन के लगभग 180 देशों में केंद्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि “आंतरिक शांति ही बाहरी सद्भाव की नींव है” के सिद्धांत पर आधारित यह आंदोलन आज एक बड़ी आध्यात्मिक और मानवीय शक्ति बन चुका है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भक्ति के अर्थ पर बोलते हुए कहा कि भक्ति केवल पूजा नहीं है, बल्कि यह स्वयं, परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता लोगों को शांतिपूर्ण जीवन जीना सिखाती है और जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाती है।

उपराष्ट्रपति ने रवि शंकर की भी प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने दुनिया को शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की सरलता और करुणा ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि ध्यान, सेवा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और अंतरधार्मिक संवाद के माध्यम से आर्ट ऑफ लिविंग ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर आत्म-संयम और अच्छे मूल्यों को अपनाने की अपील की।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत भी मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल पर गणपति मंदिर में पूजा की और आर्ट ऑफ लिविंग का एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। समारोह में देश-विदेश से आए हजारों स्वयंसेवक और श्रद्धालु उपस्थित थे।

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