नई दिल्ली, May 29 (Political Insight) : दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मंत्रालय की समीक्षा समिति को मामले की जांच करने और अगली सुनवाई से पहले अपना निर्णय रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया। साथ ही दिपके को वर्चुअल माध्यम से समिति के समक्ष पेश होने की अनुमति भी दी गई।
जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया, लेकिन मौखिक रूप से कहा कि यह मामला “दूरगामी और व्यापक प्रभाव” वाला है। अदालत ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत समीक्षा समिति को सभी पहलुओं की जांच करने का अधिकार है और यदि समिति को उचित लगे तो ब्लॉकिंग आदेश हटाकर अकाउंट बहाल किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने दलील दी कि बिना सुनवाई का अवसर दिए किसी अकाउंट को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को अब तक ब्लॉकिंग आदेश की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। सिब्बल ने अदालत से कहा कि यह मंच पूरी तरह व्यंग्यात्मक था और यदि सरकार के पास कोई आपत्तिजनक सामग्री है तो कम-से-कम उसे अदालत के समक्ष रखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए। अदालत ने टिप्पणी की कि फिलहाल रिकॉर्ड पर केवल ब्लॉकिंग की सूचना है, वास्तविक आदेश उपलब्ध नहीं है।
सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि कुछ ट्वीट आपत्तिजनक थे तो उन्हें हटाया जा सकता था, लेकिन पूरे अकाउंट को निलंबित करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि यह मामला अलग प्रकृति का है क्योंकि यहां पूरी गतिविधि को ही आपत्तिजनक बताया जा रहा है। अभिजीत दिपके ने अदालत को बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली हैं और वे इस समय विदेश में हैं। इसी आधार पर उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति दी गई। CJP एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान के रूप में शुरू हुई थी, जिसने कुछ ही दिनों में लाखों फॉलोअर्स जुटा लिए थे।