नई दिल्ली, May 16, (Political Insight) : केंद्र सरकार ने भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को और गति देने तथा मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से व्यापक रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 14 मई 2026 को नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन एवं पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh की सह-अध्यक्षता में मत्स्य निर्यात प्रोत्साहन पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में वाणिज्य विभाग और मत्स्य विभाग की योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से मत्स्य निर्यात क्षमता बढ़ाने, मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने तथा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) अनुमोदन की सुविधा सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। साथ ही अंतर्देशीय राज्यों में निर्यात अंतर का आकलन कर मीठे पानी की प्रजातियों के निर्यात को बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 अरब डॉलर) और 19.32 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसमें जमे हुए झींगों का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसने कुल निर्यात आय का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा दिया।
पीयूष गोयल ने प्रजातियों के विविधीकरण, ब्रांडिंग, मूल्यवर्धन और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। उन्होंने क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठनों (RFMO) में भारत की भागीदारी बढ़ाने, प्रसंस्करण क्षमता विस्तार और अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
वहीं, राजीव रंजन सिंह ने हर जिले में कम से कम एक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने, निर्यातकों के कौशल विकास और अंडमान-निकोबार व लक्षद्वीप में संस्थागत उपस्थिति बढ़ाने पर बल दिया। बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने के लिए साझा रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी।