नई दिल्ली, May 14, (Political Insight) : केंद्र सरकार ने देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता बढ़ गई है।
बुधवार देर रात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पहले चीनी के निर्यात पर “Restricted” नीति लागू थी, यानी कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति मिल सकती थी। अब इसे बदलकर “Prohibited” कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि सामान्य परिस्थितियों में चीनी का निर्यात नहीं किया जा सकेगा।
सरकार को आशंका है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है या भू-राजनीतिक तनाव के कारण उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो देश का शुगर बैलेंस बिगड़ सकता है। 2026-27 के दौरान कम बारिश और खाद की संभावित कमी के चलते चीनी उत्पादन में गिरावट आने का खतरा जताया गया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कुछ मामलों में राहत भी दी है। यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका (USA) को तय कोटा व्यवस्था के तहत चीनी निर्यात जारी रहेगा। इसके अलावा अग्रिम प्राधिकरण योजना (AAS) के तहत होने वाले निर्यात पर भी यह रोक लागू नहीं होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन खेपों की लोडिंग पहले ही शुरू हो चुकी है या जिनका शिपिंग बिल पहले से दाखिल किया जा चुका है, उन्हें विशेष शर्तों के तहत निर्यात की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, अचानक लगाए गए इस प्रतिबंध से चीनी मिलों और व्यापारियों के सामने कानूनी और वित्तीय चुनौतियां बढ़ने की आशंका है।