मध्य प्रदेश, May 15, (Political Insight) : भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। HC ने कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष अलग मस्जिद के लिए जमीन चाहता है, तो वह सरकार के समक्ष आवेदन दे सकता है। साथ ही अदालत ने सरकार को इंग्लैंड से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने के प्रयास करने के निर्देश भी दिए हैं।
ASI संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है। वहीं, जैन समुदाय के एक वर्ग ने भी इसे प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया था।
हिंदू पक्ष की ओर से दायर याचिका में भोजशाला को मंदिर घोषित कर वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की गई थी। करीब चार वर्षों तक चली सुनवाई और बहस के बाद HC ने यह फैसला सुनाया। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे हिंदू समाज को पूजा का अधिकार मिला है। वहीं, मुस्लिम पक्ष अब Supreme Court जाने की तैयारी कर रहा है।
फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करते हुए संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और प्रशासन पूरे हालात पर नजर बनाए हुए है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हर सरकार का दायित्व है कि वह न केवल प्राचीन स्मारकों और उनकी संरचनाओं — जिनमें ऐतिहासिक और पुरातात्विक मंदिर शामिल हैं — का संरक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि गर्भगृह और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले देवी-देवताओं का भी संरक्षण करे।