नई दिल्ली,8 अप्रैल (Political Insight)- पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच Election Commission of India ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कड़ा संदेश देते हुए साफ किया है कि इस बार चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराए जाएंगे।
चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में मतदान “भय, हिंसा, धमकी और प्रलोभन से मुक्त” होगा। आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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एजेंटों को लेकर भ्रम किया दूरः-
मतदान एजेंटों को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक, मतदान केंद्रों के भीतर एजेंटों की मौजूदगी को लेकर कोई नया नियम लागू नहीं किया गया है। पहले से लागू दिशा-निर्देश ही इस बार भी प्रभावी रहेंगे।
वहीं चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। राज्य में करीब 2,400 अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें लगभग 2,40,000 जवान शामिल हैं।
इसके अलावा, महिला सुरक्षा बलों की भी रिकॉर्ड तैनाती की गई है। करीब 20,000 महिला अर्धसैनिक जवान, यानी लगभग 200 कंपनियां, चुनाव ड्यूटी में लगाई गई हैं, जिससे मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।
दो चरणों में होगा मतदानः-
आपको बता दे कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों के लिए मतदान होगा।
वहीं मतगणना 4 मई को की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
यह चुनाव इतना अहम क्यों है?
पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के दौरान हिंसा और राजनीतिक टकराव की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे में इस बार चुनाव आयोग की सख्ती को बेहद अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और स्पष्ट निर्देशों के जरिए आयोग निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की कोशिश में है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 न सिर्फ राजनीतिक दलों के लिए अहम हैं, बल्कि यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रशासनिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।