नई दिल्लीः– भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने आंकड़े जारी किया। जिसमें बताया गया कि भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए दिसंबर 2025 में बढ़कर बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो नवंबर में 4.7 प्रतिशत थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 6.7 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर दिसंबर में 4.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही। वहीं, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी दर में हल्की गिरावट देखी गई और यह नवंबर 2025 के 9.3 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2025 में 9.1 प्रतिशत हो गई।
श्रम बल में भागीदारी के मोर्चे पर मिले सकारात्मक संकेतः-
इस बीच, श्रम बल में भागीदारी के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिले हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की समग्र श्रम बल सहभागिता दर (LFPR) दिसंबर में बढ़कर 56.1 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 55.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR दिसंबर 2025 में 59.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर में यह 58.6 प्रतिशत थी। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में इस दौरान LFPR में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 50.4 प्रतिशत से घटकर 50.2 प्रतिशत हो गई।
महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में हुआ सुधारः–
महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में समग्र रूप से हल्का सुधार देखने को मिला। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की LFPR नवंबर 2025 के 35.1 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 35.3 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 39.7 प्रतिशत से बढ़कर 40.1 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 25.5 प्रतिशत से घटकर 25.3 प्रतिशत पर आ गई।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) में भी दिसंबर 2025 के दौरान क्रमिक सुधार दर्ज किया गया। ग्रामीण पुरुषों में WPR नवंबर 2025 के 75.4 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 76.0 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत, शहरी पुरुषों में WPR नवंबर के 70.9 प्रतिशत से घटकर दिसंबर में 70.4 प्रतिशत रहा। इस तरह कुल पुरुष WPR दिसंबर 2025 में 74.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेरोजगारी दर में हल्की बढ़ोतरी के बावजूद श्रम बल भागीदारी और WPR में सुधार यह संकेत देता है कि अधिक लोग रोजगार की तलाश में श्रम बाजार से जुड़ रहे हैं। आने वाले महीनों में औद्योगिक गतिविधियों, सेवा क्षेत्र की मांग और सरकारी रोजगार एवं कौशल योजनाओं का प्रभाव श्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।