वंदे मातरम एक कर्ज़ हैः- प्रधानमंत्री

वंदे मातरम एक कर्ज़ हैः- प्रधानमंत्री

नई दिल्लीः- लोकसभा में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा शुरू हुई। यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा था। चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “वंदे मातरम” का मंत्र पूरे देश को शक्ति और प्रेरणा देता है और स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा से भरता है। उन्होंने कहा कि आज इस गीत की स्मृति सदन के सभी सदस्यों और देशवासियों के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने बताया कि “वंदे मातरम” के 150 वर्ष उस महान अध्याय को दोबारा याद करने का अवसर हैं। उन्होंने कहा कि इस गीत ने 1947 में देश की आज़ादी प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह आज भी लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब “वंदे मातरम” अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा था, तब देश में आपातकाल था। उस समय देश इस गीत का उत्सव उज्ज्वल तरीके से मनाना चाहता था, लेकिन संविधान की अवहेलना हो रही थी और देशभक्त जेल में थे।

मोदी ने कहा कि “वंदे मातरम” सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता का नारा नहीं है, बल्कि यह भारत को उपनिवेशवाद की जंजीरों से मुक्त कराने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह गीत 1857 के ब्रिटिश अत्याचारों के खिलाफ विद्रोह के दौरान लिखा गया था और बंकिमचंद्र ने इसके जरिए इस चुनौती का मजबूत और दृढ़ जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम” भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि इस गीत का लोगों के साथ गहरा संबंध स्वतंत्रता संग्राम की अपूर्व यात्रा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा और ताकत दी।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि मुस्लिम लीग का “वंदे मातरम” का विरोध 1937 में शुरू हुआ था। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने इस राष्ट्रीय गीत के मुद्दे पर मुस्लिम लीग की मांगों को स्वीकार किया। मोदी ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने गीत के खिलाफ नारे लगाए और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू ने जिन्ना की निंदा नहीं की, बल्कि जिन्ना के विरोध के पांच दिन बाद ही “वंदे मातरम” की जाँच शुरू कर दी।

इसी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि बंगाल के कई लेखक और कवि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान नए प्राण फूंकने वाले गीत लिखते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में चर्चा को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित “वंदे मातरम” पर चर्चा कर रहा है, जिसने अंग्रेजों के शासन में ऊर्जा और आशा जगाई।

आपको बताते चले कि इस चर्चा में पीएम मोदी के अलावा अनुराग ठाकुर, बिप्लब देब, बांसुरी स्वराज, संबित्र पात्रा, तेजस्वी सूर्या, संतोष पांडेय, सौमित्र खान और राजनाथ सिंह चर्चा करेंगे। वंदे मातरम बहस से जुड़े शेड्यूल के मुताबिक, सत्ताधारी एनडीए सदस्यों को लोकसभा में इसके लिए तय कुल 10 घंटों में से तीन घंटे दिए गए हैं।

शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले एक राजनीतिक टकराव शुरू हो गया था, जब राज्यसभा सचिवालय ने कहा था कि सांसदों को संसद के अंदर ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

विपक्ष ने भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए पर भारत की आजादी और एकता के प्रतीकों से असहज होने का आरोप लगाया। आपको बता दें, संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा और आने वाले दिनों में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा हंगामेदार रहने की संभावना है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत को लेकर अलग-अलग राय है।

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