मध्य प्रदेश, June 10, (Political Insight) : निवाड़ी जिले के ओरछा कस्बे के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मोहल्ले में रहने वाले महेश केवट के लिए राज्यसभा पहुंचने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस यदि अदालत से राहत हासिल नहीं कर पाती है, तो मध्य प्रदेश से महेश केवट का राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही वे केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार और भोई समाज से राज्यसभा पहुंचने वाले पहले प्रतिनिधि हो सकते हैं।
महेश केवट का राजनीतिक और सामाजिक सफर भी चर्चा में रहा है। वे वर्ष 2000 से 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी पत्नी ने भी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के रूप में लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2022 के नगर परिषद चुनाव के दौरान महेश केवट का नाम भी राजनीतिक विवादों में आया, जब स्थानीय नेतृत्व ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाते हुए निष्कासन की कार्रवाई की थी।
हालांकि बाद में मामला बदल गया, जब महेश केवट और उनके समर्थकों ने पार्टी कार्यालय भोपाल में रिकॉर्ड की जांच कराई तो कई दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आईं। दावा किया गया कि निष्कासन आदेशों में कुछ नाम बाद में जोड़े गए थे। इसके बाद पार्टी की ओर से 2023 में उनके निष्कासन को समाप्त करने का आदेश जारी किया गया।
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारों का चयन जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया है। पार्टी नेतृत्व ने उन नामों पर विचार किया जो जीत के आंकड़े और सामाजिक संदेश दोनों के लिहाज से प्रभावी साबित हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि संख्या बल को लेकर चुनौती के चलते ऐसे उम्मीदवार को प्राथमिकता दी गई है, जिसकी उम्मीदवारी से व्यापक सामाजिक संदेश जाए।
फिलहाल राजनीतिक हलकों में महेश केवट के नाम को लेकर चर्चाएं तेज हैं, और सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस की कानूनी स्थिति आगे क्या मोड़ लेती है।