कोलकाता, June 9, (Political Insight): तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी सांसद कीर्ति आजाद और कल्याण बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के खिलाफ उठ रही आवाजें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने बागी सांसदों को ‘गद्दार’ और ‘भगोड़ा’ तक कह दिया।
कीर्ति आजाद ने पार्टी में चल रही बगावत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि TMC के सांसद जनता के समर्थन और पार्टी के नारे ‘मां, माटी और मानुष’ के नाम पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, “मैं इन गद्दारों से पूछना चाहता हूं कि अगर उन्हें कोई शिकायत थी तो उन्होंने चुनाव से पहले या जीत के तुरंत बाद क्यों नहीं उठाई? अब अचानक असंतोष जताने का क्या मतलब है?”
उन्होंने पूर्व सांसद शुखेंदु शेखर रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि कम से कम उन्होंने राजनीतिक नैतिकता दिखाते हुए इस्तीफा दिया था। कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें भी राजनीतिक नैतिकता है तो वे सांसद पद से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता का सामना करें।
बागी सांसद काकोली घोष द्वारा लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजे जाने के दावे पर भी कीर्ति आजाद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस पत्र की चर्चा की जा रही है, वह अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। यहां तक कि लोकसभा स्पीकर कार्यालय ने भी किसी पत्र के प्राप्त होने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसदों का भाजपा नेताओं से लगातार संपर्क इस बात का संकेत है कि वे अब TMC के बजाय भाजपा के साथ खड़े हैं।
वहीं, कल्याण बनर्जी ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सत्ता और सुविधाओं के बिना नहीं रह सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सरकारी बंगला, गाड़ी और सुरक्षा चाहिए, इसलिए वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
कल्याण बनर्जी ने भाजपा पर भी हमला बोलते हुए कहा, “आपके पास मुख्यमंत्री, ईडी, सीबीआई और अन्य शक्तियां हो सकती हैं, लेकिन हमारे पास ‘मां, माटी, मानुष’ और पश्चिम बंगाल की जनता का समर्थन है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि बागी सांसद दल-बदल विरोधी कानून से बचना चाहते हैं तो उन्हें संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत औपचारिक रूप से भाजपा में विलय करना होगा। उनके अनुसार, केवल अलग गुट बनाकर वे कानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकते।