कोलकाता, June 9, (Political Insight): पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। सरकार का दावा है कि अब तक करीब 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। विधानसभा चुनाव के दौरान BJP ने अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का वादा किया था।
दरअसल, भारत-बांग्लादेश सीमा काफी लंबी और कई स्थानों पर संवेदनशील मानी जाती है। इसी कारण सीमा पार घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय रहा है।
पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद BJP सरकार ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए डिटेंशन सेंटर (नजरबंदी केंद्र) स्थापित करने का आदेश दिया था। 7 जून को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि लगभग 5,000 बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार वापस भेजा जा चुका है।
उन्होंने कहा, “हमने उन बांग्लादेशी घुसपैठियों को निर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते हैं।” उन्होंने बताया कि सरकार ने मई महीने में राज्य के सभी जिलों में डिटेंशन सेंटर स्थापित किए हैं।
CM ने दावा किया कि इन केंद्रों से अब तक 4,800 बांग्लादेशी घुसपैठियों को निर्वासित किया जा चुका है, जबकि फिलहाल 836 लोग डिटेंशन सेंटर में हैं। उन्होंने कहा, “हम इन 836 लोगों को भी जल्द निर्वासित करने की व्यवस्था कर रहे हैं।”
पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासन को लेकर लंबे समय से राजनीतिक तनाव बना हुआ है। इसी क्रम में सत्ता परिवर्तन के बाद यह अभियान चलाया जा रहा है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि भाजपा की बयानबाजी और नीतियों ने भारत के 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों के बीच असुरक्षा और हाशिए पर धकेले जाने की भावना को बढ़ाया है। उनका आरोप है कि पार्टी धार्मिक पहचान को अवैध प्रवासन के मुद्दे से जोड़ने का प्रयास कर रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कानून के तहत की जा रही है।