रामलिंगा रेड्डी के बाद अब कृष्णा बायरे गौड़ा नाराज, CM शिवकुमार की बढ़ीं मुश्किलें

रामलिंगा रेड्डी के बाद अब कृष्णा बायरे गौड़ा नाराज, CM शिवकुमार की बढ़ीं मुश्किलें

कर्नाटक, June 9, (Political Insight): कर्नाटक में CM डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद मंत्रिमंडल के भीतर असंतोष के संकेत सामने आने लगे हैं। विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस नेताओं की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी के विवाद के बाद अब बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा की नाराजगी चर्चा में है।

जानकारी के मुताबिक, कृष्णा बायरे गौड़ा को बेंगलुरु विकास विभाग सौंपा गया है, लेकिन उन्होंने अभी तक औपचारिक रूप से कार्यभार नहीं संभाला है। बताया जा रहा है कि उनकी नाराजगी की वजह बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BMRDA) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों का मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पास बने रहना है।

गौड़ा का मानना है कि इन दोनों एजेंसियों के बिना बेंगलुरु विकास विभाग के पास पर्याप्त अधिकार और प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता नहीं रह जाती। हालांकि उनके पास ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट पोर्टफोलियो है, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) और बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) जैसी संस्थाएं शामिल हैं, फिर भी वे विभागीय संरचना से संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णा बायरे गौड़ा इस मुद्दे को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं और कांग्रेस हाईकमान से हस्तक्षेप की मांग कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने राहुल गांधी और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के समक्ष भी अपनी बात रखी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने बेंगलुरु विकास विभाग नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया।

इसी बीच कांग्रेस विधायक रिजवान अर्शद भी मंत्री पद की दावेदारी को लेकर दिल्ली पहुंचे हैं। शिवकुमार और 13 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बावजूद मंत्रिमंडल में अभी 21 पद खाली हैं, जिससे राजनीतिक लॉबिंग तेज हो गई है। ऐसे में विभागों के बंटवारे को लेकर बढ़ती नाराजगी CM डीके शिवकुमार के लिए शुरुआती राजनीतिक परीक्षा बनती जा रही है। नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट नेताओं को साधने और मंत्रिमंडल में संतुलन बनाए रखने की है।

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