कोलकाता, June 2 (Political Insight) : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक माहौल में बदलाव की तस्वीरें सामने आ रही हैं। कूच बिहार जिले के माथाभंगा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा ग्रामीणों से कथित तौर पर वसूली गई ‘कट मनी’ लौटाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना पचगढ़ ग्राम पंचायत के फकीर कुठी इलाके की है। रविवार (31 मई 2026) को यहां एक स्कूल मैदान में विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों को बुलाया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि सभा के दौरान कई ग्रामीणों को नकद राशि लौटाई गई। कुछ मामलों में ऐसे TMC नेताओं के परिजन भी पहुंचे, जो फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे जमीन संबंधी काम, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं के नाम पर कट मनी ली गई थी, लेकिन बदले में कोई लाभ नहीं मिला। अब कथित रूप से पैसा वापस मिलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है।
स्थानीय BJP नेता सुरेंद्र बरमन ने आरोप लगाया कि पंचायत से जुड़े कुछ लोगों और TMC नेताओं ने मिलकर इलाके के ग्रामीणों से करीब 80 लाख रुपये की वसूली की थी। उन्होंने कहा कि अब बढ़ते जनदबाव के कारण राशि लौटाई जा रही है।
इस मुद्दे पर BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक वीडियो पोस्ट कर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि TMC से जुड़े लोगों द्वारा कथित रूप से रिश्वत के रूप में इकट्ठा किया गया पैसा खुले मैदानों में ग्रामीणों को लौटाया जा रहा है। मालवीय ने दावा किया कि जनता के बढ़ते आक्रोश और कार्रवाई के डर के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार की कार्यशैली का उदाहरण बताया।
बताया जा रहा है कि इस तरह की घटनाओं की शुरुआत बीरभूम जिले से हुई थी। दुबराजपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर दिलाने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत लेने के आरोप में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। आरोप है कि कई ग्रामीणों से 10 हजार से 30 हजार रुपये तक लिए गए थे। लंबे समय तक शिकायतों के बावजूद समाधान न मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ती गई, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन सामने आए।
In an extraordinary spectacle from West Bengal, money collected as Cut Money by those associated with TMC is being returned to villagers in open fields.
Why in the open? Because public anger is boiling over and the fear of arrest is real.
This was the true state of governance… pic.twitter.com/0i6apTKd5z
— Amit Malviya (@amitmalviya) June 1, 2026