मुंबई, June 2 (Political Insight): महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना के दोनों गुट उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे खेमे भविष्य में फिर एक साथ आ सकते हैं। हाल ही में दोनों गुटों के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
छत्रपति संभाजीनगर में दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए ऐसे संकेत दिए हैं। वहीं, शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने भी दोनों गुटों के एक होने की संभावना से इनकार नहीं किया।
जब दोनों नेताओं से पूछा गया कि क्या शिवसेना के दोनों गुटों को फिर एक हो जाना चाहिए, तो उनके जवाब सकारात्मक रहे। अंबादास दानवे ने कहा, “मुझे कई बार ऐसा लगता है, लेकिन केवल मेरे चाहने से कुछ नहीं होगा।” वहीं, अब्दुल सत्तार ने कहा, “यह सही समय है कि हम एक हो जाएं। अगर हमारे नेता एकनाथ शिंदे इस पर सहमत हों, तो दोनों गुटों के एक होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।”
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने हैं कि शिवसेना के पुनर्मिलन की चर्चा होने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह छत्रपति संभाजीनगर और राज्य के अन्य हिस्सों में बदलते राजनीतिक समीकरण हैं।
गौरतलब है कि कभी औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद में अविभाजित शिवसेना का दबदबा हुआ करता था। हालांकि, 2022 में पार्टी में हुई बगावत के बाद स्थिति बदल गई और कई स्थानीय निकायों में भाजपा का प्रभाव बढ़ गया। अंबादास दानवे ने दावा किया कि औरंगाबाद-जालना लोकसभा सीट पर परंपरागत रूप से शिवसेना चुनाव लड़ती रही है, लेकिन इस बार भाजपा ने शिंदे गुट के दावों को दरकिनार कर अपना उम्मीदवार उतार दिया। भाजपा के इस कदम को भी शिवसेना के भीतर बढ़ती बेचैनी की एक वजह माना जा रहा है।
ऐसे में दोनों गुटों के नेताओं के हालिया बयान महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं को और तेज कर रहे हैं।