असम में हिमंत बिस्वा सरमा का जलवा बरकरार, गठबंधन की लगातार तीसरी बड़ी जीत

असम में हिमंत बिस्वा सरमा का जलवा बरकरार, गठबंधन की लगातार तीसरी बड़ी जीत

असम, May 5, (Political Insight): असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक बार फिर दमदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने दो-तिहाई के करीब बहुमत हासिल किया, जबकि सरमा ने जालुकबाड़ी सीट से लगातार छठी बार जीत दर्ज की।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसके सहयोगी दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में कांग्रेस अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी और उसके कई प्रमुख चेहरे अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे।

असम के साथ-साथ देश के चार राज्यों-पुडुचेरी, केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 4 मई को मतगणना संपन्न हुई। इनमें भाजपा पश्चिम बंगाल, असम और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में बहुमत हासिल कर जीत की हैट्रिक लगाने में सफल रही।

सीटों का बंटवारा

मतगणना के नतीजों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 82 सीटें जीतीं, जबकि बोडो पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद को 10-10 सीटें मिलीं। कांग्रेस के खाते में 19 सीटें आईं, जबकि एआईयूडीएफ और रायजोर दल को दो-दो सीटें हासिल हुई और तृणमूल कांग्रेस को एक सीट मिली।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को 1,27,151 वोट मिले। उन्होंने अपनी सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नेओग को 89,434 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे राज्य में उनकी मजबूत पकड़ का संकेत मिलता है।

विपक्ष को झटका

कांग्रेस के लिए यह चुनाव कई स्तरों पर बड़ा झटका साबित हुआ। प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित पार्टी के कई दिग्गज उम्मीदवार हार गए, जिससे संगठनात्मक कमजोरी और रणनीतिक चूक उजागर हुई।

परिणाम आने के बाद कांग्रेस नेतृत्व में भी हलचल देखी गई, और पार्टी प्रभारी जितेंद्र सिंह ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया। इस हार ने असम में विपक्षी गठबंधन के सामने चुनौती को और बढ़ा दिया है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को 46,257 वोट मिले और वे हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 वोटों से हार गए। गौरव गोगोई के लिए यह पहला विधानसभा चुनाव था। वर्तमान में वे जोरहाट से लोकसभा सांसद हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में वे अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सके।

राजनीतिक असर

हिमंत बिस्वा सरमा अब पूर्वोत्तर की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जा रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद उन्हें राज्य में पार्टी विस्तार और संगठन को मजबूत करने वाला प्रमुख चेहरा माना जाता है।

यह नतीजा न सिर्फ असम में भाजपा-नीत गठबंधन की मजबूती दिखाता है, बल्कि आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति में सरमा की भूमिका और भी अहम होने का संकेत देता है।

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