नई दिल्ली, 12 Apr, (Political Insight): कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 16 अप्रैल से प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह सत्र नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए बुलाया गया है।
खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें हाल ही में इस विशेष सत्र के बारे में जानकारी मिली है, लेकिन सरकार ने विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही इसे बुला लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सहयोग मांग रही है, लेकिन परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।
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बिना जानकारी के सार्थक चर्चा संभव नहीं
खड़गे ने कहा कि परिसीमन और अन्य जरूरी पहलुओं की जानकारी के बिना इस ऐतिहासिक कानून पर सार्थक चर्चा करना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की।
सर्वदलीय बैठक न होने पर नाराजगी
अपने पत्र में खड़गे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि सरकार ने राजनीतिक दलों के साथ संवाद किया है, लेकिन यह वास्तविकता के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल 29 अप्रैल 2026 को चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, ताकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर विस्तार से चर्चा हो सके।
चुनाव के बीच सत्र बुलाने पर उठाए सवाल
खड़गे ने आरोप लगाया कि मौजूदा राज्य चुनावों के दौरान विशेष सत्र बुलाना इस बात का संकेत देता है कि सरकार इस विधेयक को जल्दबाजी में लागू कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, न कि वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना।
29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाने की सलाह
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है और सभी को साथ लेकर चलना चाहती है, तो उसे 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।