नई दिल्ली,8 अप्रैल, (Political Insight)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब हालात कुछ हद तक सामान्य होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने संकेत दिया है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित आवागमन की अनुमति देता है, तो अमेरिका दो सप्ताह के प्रस्तावित युद्धविराम के लिए तैयार है।
सोशल मीडिया पर किए गए अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय युद्धविराम पर सहमत होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब संघर्ष समाधान के करीब है।
हालांकि, इससे पहले ट्रंप का रुख काफी सख्त था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने समझौता नहीं किया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।
वहीं दूसरी ओर, ईरान ने भी नरमी के संकेत दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ने कहा है कि यदि ईरान पर हमले बंद किए जाते हैं, तो उनका देश युद्धविराम के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रस्तावित दो सप्ताह की अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सकता है।
गौरतलब है कि Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित करता है।
हम सभी जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कोई नया नहीं है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर विवाद चलता रहा है। हाल के दिनों में इस तनाव ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ीं और एक-दूसरे को कड़ी चेतावनियां दी गईं।
इस बीच, संभावित युद्धविराम की खबरों का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 16 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर से नीचे आ गई और लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। तेल कीमतों में इस गिरावट से दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी तेजी देखी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के साथ सीधी बातचीत की तैयारी कर रहा है। इस बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वैंस (JD Vance) कर सकते हैं। वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट (Karoline Leavitt) ने भी स्वीकार किया है कि आमने-सामने बातचीत को लेकर चर्चा जारी है और अंतिम घोषणा जल्द की जा सकती है।
फिलहाल, दोनों देशों के बयानों से यह साफ है कि वे टकराव से पीछे हटकर बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। अगर यह युद्धविराम लागू होता है, तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता आएगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।