नई दिल्लीः- PM मोदी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का संतुलित और सक्रिय दृष्टिकोण उसकी मजबूत कूटनीतिक क्षमता और संकट प्रबंधन की दक्षता को दर्शाता है। राजधानी में एक निजी मीडिया समूह द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत आत्मविश्वास और विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 28 फरवरी से अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में बढ़ती अस्थिरता विशेष रूप से पश्चिम एशिया में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर प्रभाव डाला है। ऐसे समय में भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए संतुलित कूटनीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि भारत “किसी भी चुनौती से पीछे हटने वाला नहीं है, बल्कि उसका डटकर सामना करता है।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युद्ध जैसी जटिल परिस्थितियों में दुनिया ने भारत की नीतियों, रणनीतिक सोच और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को पहचाना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत आज खाड़ी देशों, ग्लोबल वेस्ट, ग्लोबल साउथ और पड़ोसी देशों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है।
ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में संभावित बाधाओं- विशेषकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए—को देखते हुए भारत ने वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडार को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।
इसके अलावा, सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने, सप्लाई चेन को बाधित न होने देने और आम नागरिकों पर महंगाई का बोझ कम करने के लिए कई उपाय लागू किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बहु-आयामी कूटनीति—जिसमें अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और रूस के साथ संतुलन बनाए रखना शामिल है—इस संकट के समय देश को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि “140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक प्रयास ही देश को हर संकट में आगे बढ़ाता है।” उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में निवेश को देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख स्तंभ बताया।
आपको बता दे कि इससे पहले PM मोदी ने सदन में भी अपनी बात रखी, जिसमें उन्होनें अपनी प्रतिबद्ध्ताओं को दोहराते हुए सदन में सरकार का पक्ष जनता के समक्ष रखा था।
अंत में, प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखेगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन भी बना रहेगा।