नई दिल्लीः- PM मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनज़र देश की तैयारी और प्रभावों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष लगातार बदलती हुई स्थिति है और इसके प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था सहित भारत भी अछूता नहीं रह सकता।
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार के सभी विभाग समन्वित तरीके से काम करें, ताकि देश के नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। उन्होंने विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और कालाबाज़ारी व जमाखोरी पर सख्त निगरानी रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने को कहा।
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेष समूह के गठन के निर्देश भी दिए, जो समग्र सरकारी रणनीति के तहत राहत और प्रबंधन कार्यों की निगरानी करेगा। साथ ही, विभिन्न क्षेत्रीय समूहों को उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के साथ नियमित परामर्श करने को कहा गया है।
आपको बता दे कि इस बैठक में कैबिनेट सचिव T.V. सोमनाथन ने वैश्विक हालात और भारत सरकार द्वारा अब तक उठाए गए तथा प्रस्तावित कदमों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, कृषि, निर्यात, शिपिंग, वित्त, MSME और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर संभावित प्रभावों का आकलन शामिल था।
सरकार ने इस बैठक में विशेष रूप से ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि पश्चिम एशिया भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में तेल आपूर्ति में किसी भी व्यवधान से कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की पहचान और रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) के उपयोग पर भी चर्चा की गई।
इसके अलावा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए आयात स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना पर भी विचार किया गया। सरकार निर्यात के नए बाजार तलाशने और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाने जा रही है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, सरकार संभावित महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए वित्तीय और मौद्रिक उपायों पर भी नजर बनाए हुए है। आम नागरिकों को राहत देने के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण और आपूर्ति बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि स्थिति के अनुसार आगे और सख्त या राहतकारी कदम उठाए जा सकते हैं। आने वाले दिनों में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित उपायों को अंतिम रूप देकर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।