पश्चिम एशिया संकट PM मोदी ने संसद के उच्च सदन में रखा सरकार का पक्ष

पश्चिम एशिया संकट PM मोदी ने संसद के उच्च सदन में रखा सरकार का पक्ष

नई दिल्लीः-  PM मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांति बहाली के लिए संवाद और कूटनीति को ही सबसे प्रभावी रास्ता बताया है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश लगातार तनाव कम करने और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित बनाए रखने के प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि संघर्ष के बाद से उन्होंने खाड़ी देशों के कई नेताओं के अलावा ईरान, इज़राइल और अमेरिका के नेताओं से भी टेलीफोन पर बातचीत की है। उन्होंने कहा कि भारत का स्पष्ट उद्देश्य बातचीत के जरिए क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे जल्द से जल्द खोलना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय नौवहन में बाधा डालना “अस्वीकार्य” है। भारत कूटनीतिक माध्यमों से अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

ऊर्जा और व्यापार पर असर, भारत के लिए चिंताः-

PM मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारत लगातार आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास कर रहा है और हाल के दिनों में कई जहाज कच्चा तेल और LPG लेकर भारत पहुंचे हैं।

भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताः-

PM मोदी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जबकि ईरान से भी लगभग एक हजार नागरिकों की वापसी सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई भारतीय नाविक अभी भी विभिन्न जहाजों पर फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

आत्मनिर्भरता और रणनीतिक तैयारी पर जोरः-

प्रधानमंत्री ने अपने इस सम्बोधन में कहा कि इस संकट ने आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को और भी स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने बताया कि भारत अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर चुका है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।
साथ ही, ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी समुद्री और रक्षा क्षमताओं को भी तेजी से मजबूत कर रहा है।

किसानों और आम जनता को आश्वासनः-

प्रधानमंत्री ने अपने इस सम्बोधन के माध्यम से सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। आगामी बुवाई सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।
इससे पहले प्रधानमंत्री ने लोकसभा में भी मौजूदा स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस संकट के अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।

कुल मिलाकर, भारत ने पश्चिम एशिया संकट के बीच संतुलित कूटनीति, नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है।

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