बंगालः- भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराए जाते हैं, तो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 2,500 कंपनियों की आवश्यकता होगी।
सूत्रों के मुताबिक, एकल चरण में चुनाव कराने का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय को भेजा गया है। हालांकि, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग ही करेगा।
आयोग के एक सूत्र ने बताया कि एकल चरण के चुनाव की सिफारिश मिलने के बाद आयोग ने सुरक्षा बलों की आवश्यकता का प्रारंभिक मूल्यांकन किया। अनुमान के अनुसार, पूरे राज्य में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 2,500 CAPF कंपनियों की जरूरत पड़ सकती है।
सूत्रों का कहना है कि अब आयोग इस विषय पर केंद्रीय गृह मंत्रालय से चर्चा कर सकता है, ताकि यह तय किया जा सके कि इतनी संख्या में सुरक्षा बल उपलब्ध कराए जा सकते हैं या नहीं। उपलब्धता के आधार पर ही चुनाव चरणों की अंतिम संख्या निर्धारित की जाएगी।
पिछले चुनावों का आंकड़ाः-
मिली जानकारी के अनुसार 2024 के लोकसभा चुनाव, जो राज्य में हाल का बड़ा चुनाव था, के दौरान CAPF की 1,099 कंपनियां तैनात की गई थीं। वहीं 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में हुए थे, जिनमें 725 कंपनियों की तैनाती की गई थी।
आपको बता दे कि पश्चिम बंगाल में आखिरी बार 2001 के विधानसभा चुनाव एक ही चरण में कराए गए थे। उसके बाद सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से बहु-चरणीय मतदान की परंपरा रही है।
एक चरण के चुनाव के संभावित प्रभावः-
CEO कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, एक चरण में मतदान कराने का एक संभावित लाभ यह हो सकता है कि राजनीतिक दल अपने समर्थकों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित कर प्रभाव डालने की कोशिश नहीं कर पाएंगे। इससे मतदान के दिन या उससे पहले बाहरी तत्वों की मौजूदगी को लेकर उठने वाली शिकायतों में कमी आ सकती है और मतदाताओं को डराने-धमकाने की आशंका भी घट सकती है।
हालांकि, सुरक्षा बलों की भारी तैनाती, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक तैयारियां एक बड़ी चुनौती होंगी। ऐसे में अंतिम निर्णय सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता और व्यापक आकलन के बाद ही लिया जाएगा।