लखनऊः- CM योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले साढ़े आठ वर्षों में निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश ने ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से निकलकर ‘पॉलिसी स्टेबिलिटी’ की दिशा में निर्णायक यात्रा तय की है, जिसका सकारात्मक असर निवेश माहौल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो प्रदेश कभी ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ के लिए चर्चित था, आज वही प्रदेश ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)’ योजना के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। ODOP के जरिए पारंपरिक उत्पादों को न केवल ब्रांडिंग और मार्केटिंग का समर्थन मिला है, बल्कि निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार हजारों कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों को इस योजना से सीधा लाभ मिला है।
ट्रिपल-टी और ट्रिपल-एस मॉडल पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के लिए भरोसा, पारदर्शिता और समयबद्धता अनिवार्य हैं। प्रदेश सरकार ‘ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्म और टाइमली डिलीवरी’ के ट्रिपल-टी मॉडल पर काम कर रही है। इसके साथ ही ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ के ट्रिपल-एस मॉडल के जरिए निवेशकों को सुरक्षित और स्थिर वातावरण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार और माफिया पर सख्त कार्रवाई ने उद्योगों के लिए भयमुक्त माहौल तैयार किया है।
निवेश प्रक्रिया हुई सरल और पारदर्शीः-
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने 34 से अधिक सेक्टोरल नीतियां लागू की हैं। ‘निवेश मित्र’, ‘निवेश सारथी’ और ‘उद्यमी मित्र’ जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से अनुमोदन प्रक्रिया को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सरल बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि डीरेगुलेशन और डीक्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य अधिनियमों के 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधान समाप्त किए गए हैं, जिससे उद्योगों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से राहत मिली है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में छलांगः-
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में 14वें स्थान पर था, जबकि अब प्रदेश ‘टॉप अचीवर स्टेट’ के रूप में स्थापित हो चुका है। निवेशकों के लिए समयबद्ध स्वीकृति, ऑनलाइन क्लीयरेंस और पारदर्शी नीति ढांचे ने प्रदेश को प्रतिस्पर्धी राज्यों की श्रेणी में ला खड़ा किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आजादी से 2017 तक प्रदेश में लगभग 14 हजार कारखाने स्थापित हुए थे, जबकि 2017 के बाद इनकी संख्या बढ़कर 31 हजार से अधिक हो गई है। पिछले साढ़े आठ वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन निवेश परियोजनाओं से लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री आपने भाषण में दावा किया कि देश के कुल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का लगभग 55 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण में प्रदेश की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के प्रमुख हब के रूप में उभरे हैं। इसके अलावा रक्षा कॉरिडोर परियोजना के तहत रक्षा उत्पादन में भी तेजी आई है, जिससे एमएसएमई सेक्टर को नई ऊर्जा मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों के विकास ने औद्योगिक माहौल को मजबूती दी है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं ने कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। साथ ही, डिफेंस कॉरिडोर और डेटा सेंटर नीति के जरिए उच्च तकनीक निवेश को आकर्षित किया जा रहा है।
लक्ष्य:- ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ सरकार सतत प्रयास कर रही है। कृषि, एमएसएमई, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में समन्वित विकास के माध्यम से प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के मॉडल के आधार पर उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनेगा।