नई दिल्ली/काठमांडू:- नेपाल में आम चुनाव 2026 की तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए 5 मार्च 2026 को मतदान होगा। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। यह चुनाव Gen-Z आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार के गिरने के बाद बनी पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार के उस वादे के तहत कराए जा रहे हैं, जिसमें जल्द चुनाव कराने की बात कही गई थी।
चुनावों को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के मद्देनज़र भारत और नेपाल ने सीमा सुरक्षा कड़ी करने का फैसला किया है। इसी क्रम में दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों ने भारत–नेपाल सीमा की चौकियों को 72 घंटे के लिए बंद रखने पर सहमति जताई है। यह निर्णय चुनाव से पहले, चुनाव के दिन और उसके तुरंत बाद लागू रहेगा।
इस संबंध में शुक्रवार को नेपाल के मोरंग जिले के बीरतनगर में नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APAF) और भारत के सशस्त्र सीमा बल (SSB) के बीच 16वीं DIG-स्तरीय समन्वय बैठक हुई। बैठक में चुनाव के दौरान अवांछित तत्वों की घुसपैठ रोकने, सीमा नियंत्रण को सख्त करने और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति बनी।
APAF के प्रवक्ता DIG बिष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि नेपाल की ओर से चुनाव से दो दिन पहले सीमा चौकियां बंद करने का अनुरोध किया गया था, जिस पर भारतीय पक्ष ने सहमति दी। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सीमा बंद करना दोनों देशों में एक स्थापित प्रथा है, ताकि भारी सुरक्षा तैनाती के बीच सीमा पार से किसी भी तरह की अवांछित आवाजाही रोकी जा सके।
APAF के मुताबिक, बैठक में सीमा पार अपराध, तीसरे देशों के नागरिकों का अवैध प्रवेश, मानव तस्करी, नकली मुद्रा, हथियार और गोला-बारूद, तथा नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने एक बार फिर खुली सीमा का दुरुपयोग कर कश्मीरी और पाकिस्तानी आतंकवादी तत्वों की संभावित घुसपैठ को लेकर अपनी चिंता साझा की।
नेपाल के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य में तराई और शहरी इलाकों में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों (गैंग मूवमेंट) को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। हाल के वर्षों में इन गिरोहों पर तस्करी नेटवर्क, जबरन वसूली, चुनावी फंडिंग में दखल और स्थानीय राजनीति पर प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं। चुनावी माहौल में धनबल और बाहुबल के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखे हुए हैं।
राजनीतिक रूप से यह चुनाव नेपाल के लिए निर्णायक माना जा रहा है। अंतरिम सरकार, टूटे-फूटे गठबंधन, और युवा मतदाताओं की बढ़ती भूमिका के बीच यह चुनाव सत्ता संतुलन और नीतिगत दिशा तय करेगा। प्रमुख दलों के साथ-साथ नए और युवा-केंद्रित राजनीतिक समूह भी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
इस बैठक में सीमा स्तंभों की सुरक्षा, संयुक्त गश्त, यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही, आपदा राहत अभ्यास, और संयुक्त खेल/प्रशिक्षण गतिविधियों पर भी सहमति बनी। दोनों पक्षों ने संवेदनशील सीमा बिंदुओं की पहचान, जोखिम आकलन, शरणार्थियों व प्रवासियों की निगरानी, तथा नियमित समन्वय और जांच को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
अधिकारियों का कहना है कि इन उपायों से न केवल नेपाल के आम चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगे, बल्कि भारत–नेपाल सुरक्षा सहयोग को भी नई मजबूती मिलेगी।