सांख्यिकी मंत्रालय ने जारी किया आंकड़ा,जिसमें बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत

महाराष्ट्र में शुक्रवार को नगर निकाय चुनावों के लिए वोटों की गिनती शुरू हो गई। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अहम बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में शुरुआती बढ़त बना ली है। करीब नौ साल बाद हुए नगर निकाय चुनाव इन नतीजों पर इसलिए भी करीब से नजर रखी जा रही है, क्योंकि लगभग नौ साल के लंबे अंतराल के बाद राज्य में 29 नगर निकायों के लिए चुनाव कराए गए हैं। शुरुआती रुझान महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाले माने जा रहे हैं। बीएमसी में भाजपा गठबंधन आगे शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई की बीएमसी में भाजपा गठबंधन 34 वार्डों में आगे चल रहा है। इनमें भारतीय जनता पार्टी 25 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट नौ वार्डों में आगे है। ठाकरे भाइयों की चुनौती भाजपा गठबंधन के ठीक पीछे ठाकरे भाई हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 23 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) तीन वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। इस तरह ठाकरे कैंप कुल 26 वार्डों में आगे नजर आ रहा है। प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी बीएमसी इस मुकाबले को खासतौर पर मुंबई में प्रतिष्ठा की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। बीएमसी पर नियंत्रण का राजनीतिक ही नहीं, बल्कि वित्तीय रूप से भी बड़ा महत्व है। 74,400 करोड़ रुपए के बजट वाली बीएमसी बीएमसी का सालाना बजट 74,400 करोड़ रुपए से अधिक है। यहां चार साल की देरी के बाद चुनाव कराए गए। अकेले मुंबई में 227 सीटों के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जो कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। पूरे महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों में मतदान राज्य भर में गुरुवार को 29 नगर निकायों के 893 वार्डों में फैली 2,869 सीटों के लिए वोटिंग हुई। कुल 15,931 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करने के लिए 3.48 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र थे। पुणे के नतीजों पर भी टिकी नजर मुंबई के अलावा पुणे भी एक अहम चुनावी मैदान बना हुआ है। यहां एक असामान्य राजनीतिक गठबंधन देखने को मिला, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो विरोधी गुट- उपमुख्यमंत्री अजित पवार और उनके चाचा व राज्यसभा सांसद शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट- नगर निगम चुनाव के लिए एक साथ आए। एनसीपी की आंतरिक राजनीति पर असर पुणे के नतीजों से आगामी राज्य और राष्ट्रीय चुनावों से पहले एनसीपी के भीतर बदलती सत्ता की गतिशीलता को लेकर अहम संकेत मिलने की उम्मीद है। गिनती जारी, रुझान बदलने की संभावना फिलहाल वोटों की गिनती जारी है और राजनीतिक दल सतर्क बने हुए हैं, क्योंकि शुरुआती रुझानों में बदलाव संभव है। अंतिम नतीजों से महाराष्ट्र के स्थानीय शासन के परिदृश्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

नई दिल्लीः– भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने आंकड़े जारी किया। जिसमें बताया गया कि भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए दिसंबर 2025 में बढ़कर बेरोजगारी दर 4.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो नवंबर में 4.7 प्रतिशत थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 6.7 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर दिसंबर में 4.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी रही। वहीं, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी दर में हल्की गिरावट देखी गई और यह नवंबर 2025 के 9.3 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2025 में 9.1 प्रतिशत हो गई।

श्रम बल में भागीदारी के मोर्चे पर मिले सकारात्मक संकेतः-

इस बीच, श्रम बल में भागीदारी के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत मिले हैं। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों की समग्र श्रम बल सहभागिता दर (LFPR) दिसंबर में बढ़कर 56.1 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 55.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR दिसंबर 2025 में 59.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि नवंबर में यह 58.6 प्रतिशत थी। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में इस दौरान LFPR में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 50.4 प्रतिशत से घटकर 50.2 प्रतिशत हो गई।

महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में हुआ सुधारः

महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में समग्र रूप से हल्का सुधार देखने को मिला। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की LFPR नवंबर 2025 के 35.1 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 35.3 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 39.7 प्रतिशत से बढ़कर 40.1 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 25.5 प्रतिशत से घटकर 25.3 प्रतिशत पर आ गई।
श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) में भी दिसंबर 2025 के दौरान क्रमिक सुधार दर्ज किया गया। ग्रामीण पुरुषों में WPR नवंबर 2025 के 75.4 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 76.0 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत, शहरी पुरुषों में WPR नवंबर के 70.9 प्रतिशत से घटकर दिसंबर में 70.4 प्रतिशत रहा। इस तरह कुल पुरुष WPR दिसंबर 2025 में 74.1 प्रतिशत दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बेरोजगारी दर में हल्की बढ़ोतरी के बावजूद श्रम बल भागीदारी और WPR में सुधार यह संकेत देता है कि अधिक लोग रोजगार की तलाश में श्रम बाजार से जुड़ रहे हैं। आने वाले महीनों में औद्योगिक गतिविधियों, सेवा क्षेत्र की मांग और सरकारी रोजगार एवं कौशल योजनाओं का प्रभाव श्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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