उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण न करने वालों पर तीन महीने तक नहीं होगी कोई जुर्माना या कार्रवाईः- सरकार

उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण न करने वालों पर तीन महीने तक नहीं होगी कोई जुर्माना या कार्रवाईः- सरकार

नई दिल्लीः- अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार अगले तीन महीनों तक उन लोगों पर कोई जुर्माना या सख्त कार्रवाई नहीं करेगी जिन्होंने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं कराया है। उन्होंने बताया कि आज पंजीकरण की अंतिम तिथि है, लेकिन अभी भी लाखों संपत्तियां पंजीकृत नहीं हैं।
नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए श्री रिजिजू ने बताया कि यह निर्णय कई सांसदों और समुदाय के प्रतिनिधियों के अनुरोध पर लिया गया है, जिन्होंने मुतवल्लियों को पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने में जो चुनौतियां आ रही हैं, उन्हें ध्यान में रखा। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के संरक्षकों, मुतवल्लियों से अपील की कि यदि वे रियायती अवधि के अंतर्गत पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं, तो वे वक्फ न्यायाधिकरण से संपर्क करें।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों में स्पष्ट किया है कि छह महीने की समय सीमा के बाद इसे बढ़ाया नहीं जा सकता, लेकिन यदि पंजीकरण में कोई समस्या आती है, तो न्यायाधिकरण छह महीने तक इसे आगे बढ़ाने का अधिकार रखता है। अब तक उम्मीद पोर्टल पर एक लाख 51 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हो चुकी हैं।

‘उम्मीद’ पोर्टल’

केंद्र सरकार ने 6 जून, 2025 को ‘उम्मीद’ पोर्टल लॉन्च करने की घोषणा की थी। यह पोर्टल भारत सरकार द्वारा वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन, पारदर्शिता और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।

Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development: UMMEED के नाम से जाना जाने वाला यह ऑनलाइन मंच वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, प्रबंधन एवं निगरानी को डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा। पोर्टल वक्फ बोर्ड्स और संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को भी प्रोत्साहित करता है। यह पोर्टल ‘एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता एवं विकास अधिनियम’ के तहत कार्य करेगा और इसके संचालन की जिम्मेदारी अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को दी गई है।

मुख्य विशेताएँः-

इस पोर्टल में देशभर की वक्फ संपत्तियों का केंद्रीय डाटाबेस शामिल है, जिसमें संपत्तियों का विवरण, स्थान और स्वामित्व की जानकारी होगी। संपत्तियों की पहचान के लिए चुनाव आयोग के डाटा का उपयोग किया जाएगा ताकि जानकारी सटीक और विश्वसनीय हो।

पंजीकरण प्रक्रिया के तहत, राज्य वक्फ बोर्ड्स के माध्यम से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। पोर्टल पर छह महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण आवश्यक होगा। अपंजीकृत या विवादित संपत्तियों को वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो स्वामित्व और वैधता पर निर्णय करेगा।
इस पोर्टल के माध्यम से प्रबंधन में सुधार, पारदर्शिता, हितधारकों का सशक्तिकरण और विवादों के समाधान की उम्मीद है।

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