नई दिल्लीः- भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर श्री संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के निर्णयों की घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती करते हुए इसे 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया है। साथ ही, मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा गया है।
गवर्नर के निर्देशानुसार, बैंक अर्थव्यवस्था में तरलता सुनिश्चित करने हेतु 1 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद को ओपन मार्केट ऑपरेशंस के माध्यम से क्रियान्वित करेगा। इसके अतिरिक्त, डॉलर-रुपया स्वैप व्यवस्था के अंतर्गत 5 अरब डॉलर की अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्रीय बैंक ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) रेट को 5% तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) रेट को 5.50% तक घटाने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर माह में हुई पिछली बैठक में रेपो रेट स्थिर रखा गया था।
गवर्नर मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक संकेतों की चर्चा करते हुए कहा कि जीएसटी रेशनलाइजेशन, कृषि क्षेत्र की प्रगति एवं कंपनियों के सुदृढ़ वित्तीय प्रदर्शन अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे।
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान व्यक्त किया है, जो पूर्वानुमान 6.8% से उच्च है। तिमाही आधार पर दिसंबर तिमाही के लिए 7%, मार्च तिमाही के लिए 6.5%, जून तिमाही के लिए 6.7% एवं सितंबर तिमाही के लिए 6.8% वृद्धि अपेक्षित है।
देश का विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो लगभग 11 माह के आयात व्यय के लिए पर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर 2% रहने का अनुमोदित अनुमान है, जबकि पूर्वानुमान 2.6% था।
पिछले सप्ताह गवर्नर ने आर्थिक स्थिरता एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए रेपो रेट में कटौती की संभावना का संकेत दिया था, जो 5 दिसंबर को हुई मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में कार्यान्वित हुआ।