सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की, कि घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
इस याचिका में अधिकारियों की हिरासत में कुछ रोहिंग्याओं के लापता होने का आरोप था। उन्होंने कहा कि देश में अवैध रूप से प्रवेश करने वालों के लिए विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। पीठ ने यह भी कहा कि लाभ और सुविधाएँ केवल देश के नागरिकों के लिए होनी चाहिए, न कि अवैध प्रवासियों के लिए। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध प्रवासियों के साथ हिरासत में यातना नहीं की जानी चाहिए।