कोलकाता, June 5, (Political Insight) : पश्चिम बंगाल की सियासत हर दिन नया मोड़ ले रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी को लेकर राज्य की राजनीति में नई अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि ममता बनर्जी लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर लोकसभा सीट से सांसद यूसुफ पठान से इस्तीफा देने का आग्रह किया है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी इस सीट पर उपचुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचना चाहती हैं।
जानकारी के अनुसार, यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी के लिए सीट छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। इसी बीच, उनके पुराने सहयोगी हुमायूं कबीर ने उन्हें बड़ा प्रस्ताव दिया है। हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को रेजीनगर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव हार चुकी हैं।
हुमायूं कबीर ने कहा कि वह चाहते हैं कि ममता बनर्जी राज्य की राजनीति में सक्रिय बनी रहें। इसलिए वह अपनी एक सीट उनके लिए खाली करने को तैयार हैं। गौरतलब है कि हुमायूं कबीर ने विधानसभा चुनाव दो सीटों से लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की थी, जिनमें रेजीनगर सीट भी शामिल है।
इस बीच, संकटग्रस्त तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और झटका तब लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अब पहले की तरह काम नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए मैंने इस्तीफा दिया है। अन्यथा यह मेरे पद का अपमान होता। जो भी मेरा पदभार संभालेगा, उसे मेरी शुभकामनाएं।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद TMC में अंदरूनी असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। एक ओर पार्टी के 60 विधायकों ने बगावत कर नेतृत्व से अलग अपना नेता चुन लिया है, वहीं दूसरी ओर कई अन्य विधायकों के भी असंतोष के चलते अलग राह अपनाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ते इस असंतोष को नियंत्रित करने और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए ममता बनर्जी लोकसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं।
हालांकि, यूसुफ पठान द्वारा इस्तीफा देने से इनकार किए जाने के बाद ममता बनर्जी की राह आसान नहीं दिख रही है। सांसद बनने के लिए उन्हें पहले किसी मौजूदा सांसद की सीट खाली करानी होगी, जिसके बाद वहां उपचुनाव कराया जाएगा। उस उपचुनाव में जीत हासिल कर ही वह लोकसभा पहुंच सकती हैं। हालांकि, बहरामपुर सीट से जीत दर्ज करना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि वह पिछले तीन चुनावों में से दो में हार का सामना कर चुकी हैं।