नई दिल्लीः- भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। निशिकांत दुबे ने पत्र में राहुल गांधी के खिलाफ जांच की मांग करते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की भी अपील की है।
अपने दो पन्नों के पत्र में निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने “देश के पूरे नैतिक ताने-बाने को तोड़ दिया है।” उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी कथित तौर पर “भारत को अंदर से अस्थिर करने वाले ठग गैंग” का हिस्सा हैं और संसद के अंदर तथा बाहर उनके बयान देशहित के खिलाफ हैं। दुबे ने राहुल गांधी के चार कथित ‘गलत कृत्यों’ का भी उल्लेख किया है।
पूर्व सेना प्रमुख का नाम घसीटने का आरोपः-
भाजपा सांसद ने अपने पत्र में 11 फरवरी को लोकसभा में दिए गए राहुल गांधी के भाषण का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का नाम “चालाकी से” घसीटा। दुबे ने कहा कि सेना का सम्मान सर्वोपरि है और कोई भी जिम्मेदार नागरिक या नेता ऐसा कदम नहीं उठाता जिससे सेना की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगे।
‘सरकार को बदनाम करने की आदत’-
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया हो। उनके अनुसार, रक्षा, वित्त, वाणिज्य और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राहुल गांधी संसद और सार्वजनिक मंचों पर “बेबुनियाद” आरोप लगाते रहे हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि उनके इस रवैये से जनता की भावनाएं भड़कती हैं और संस्थाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
कॉर्पोरेट और संस्थाओं पर आरोप का मुद्दाः-
दुबे ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में विभिन्न भारतीय कॉर्पोरेट घरानों का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत से बैंकिंग प्रणाली कमजोर हुई है। भाजपा सांसद के मुताबिक, इस तरह के आरोप देश की आर्थिक छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सबूत के आरोप लगाए, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है।
जांच और कार्रवाई की मांगः-
इस पत्र में निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि एक सांसद और नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी के आचरण की तत्काल जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो उनके खिलाफ कड़ी संसदीय कार्रवाई, जिसमें सदस्यता समाप्ति भी शामिल है, की जानी चाहिए।
इस पत्र के बाद संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। हालांकि, राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इस पत्र पर अभी तक औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, किसी सांसद की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया नियमों और विशेषाधिकार संबंधी प्रावधानों के तहत होती है और अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सदन में और बहस होने की संभावना है।