नई दिल्लीः- नागर विमानन महानिदेशालय ने इंडिगो एयरलाइंस को अपने शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया है। इस कदम के पीछे इंडिगो की उड़ान सेवाओं में उत्पन्न हुई परेशानियों और उन्हें सही तरीके से हल करने में असफलता को बताया गया है।
महानिदेशालय की नोटिस में बताया गया है कि इंडिगो को इस साल नवंबर महीने में कुल 64,346 उड़ानों की मंजूरी मिली थी, लेकिन कंपनी ने केवल 59,438 उड़ानें संचालित कीं और 951 उड़ानें रद्द कीं। जबकि विमान संख्या में 6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 403 विमानों को अनुमति मिली थी, इंडिगो ने नवंबर में केवल 344 विमानों का परिचालन किया। महानिदेशालय ने इंडिगो से आज शाम पांच बजे तक संशोधित उड़ान कार्यक्रम जमा करने को कहा है।
इंडिगो एयरलाइंस के परिचालन संकट की पृष्ठभूमि
इंडिगो एयरलाइंस को 2025 के अंतिम चरण में गंभीर परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें व्यापक उड़ान रद्दीकरण एवं विलंब सम्मिलित थे। ये समस्याएं मुख्यतः क्रू सदस्यों की रॉस्टरिंग में खामियों, उड़ान ड्यूटी समय सीमाओं (FDTL) के उल्लंघन तथा मानव संसाधन की अपर्याप्तता से उत्पन्न हुईं । नवंबर 2025 में कंपनी ने कुल 1,232 उड़ानें रद्द कीं, जो समस्त भारतीय विमानन सेवाओं के 62 प्रतिशत रद्दीकरणों के बराबर थीं; इनमें 755 क्रू संबंधी बाधाओं, 258 हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों तथा 92 वायु यातायात नियंत्रण विफलताओं से जुड़ीं, जिसके फलस्वरूप समयनिष्ठता अक्टूबर के 84.1 प्रतिशत से घटकर 67.7 प्रतिशत रह गई ।
दिसंबर के प्रारंभिक चरण में संकट और गहराया
यह संकट 3 से 9 दिसंबर तक अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचा, जहां 3 दिसंबर को 200 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, 5 दिसंबर को लगभग 1,600 तथा उसके पश्चात् प्रतिदिन सैकड़ों; समयनिष्ठता 5 दिसंबर को न्यूनतम 3.7 प्रतिशत तक गिर गई ।
इसके प्रमुख कारक थे: नवीन क्रू रॉस्टर प्रणाली का कार्यान्वयन, तकनीकी विफलताएं (जैसे A320 विमान सॉफ्टवेयर का आधुनिकरण), हवाई अड्डा भीड़भाड़, , मौसमी प्रभाव तथा दीर्घकालिक न्यूनतम स्टाफिंग नीतियां, जिनकी विमान चालक संगठनों ने आलोचना की ।
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा उठाए गए कदम एवं उसका प्रभाव
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें अनुमोदित कार्यक्रमों का पालन न करने का उल्लेख किया गया—उदाहरणस्वरूप, नवंबर में 64,346 अनुमत उड़ानों में से केवल 59,438 का संचालन तथा 403 विमानों में से 344 का उपयोग । महानिदेशालय ने शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत की कटौती एवं 10 दिसंबर सायं पांच बजे तक संशोधित योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। यात्रियों द्वारा रिकॉर्ड संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं (जैसे 6 दिसंबर को एयरसेवा पर 1,344), जिसके परिणामस्वरूप 68 मिलियन डॉलर से अधिक का प्रतिपूर्ति, किराया नियंत्रण तथा दिल्ली से प्रस्थान सेवाओं का अस्थायी निलंबन हुआ; पूर्व की उच्च अधिभोग दर “Passenger Load Factor (PLF)” (81-91 प्रतिशत) के बावजूद कंपनी की समयनिष्ठता की (Punctuality) प्रतिष्ठा प्रभावित हुई ।
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