नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों और सियासी उथल-पुथल के बाद सेना ने पूरे देश में सख्त पाबंदियां और कर्फ्यू लागू कर दिया है। मंगलवार को भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
अब जेनरेशन जेड प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें रखी हैं। इन मांगों में संविधान को फिर से लिखने या संशोधन करने, शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की ओर से लूटी गई संपत्तियों की जांच शामिल है। इस बीच काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग 400 भारतीय यात्री फंस गए हैं. यात्रियों ने अपनी मुश्किलों का वीडियो संदेश भी भेजा है, जिसमें उन्होंने सुरक्षा और मदद की गुहार लगाई है ।
फंसे हुए लोगों का कहना है कि इम्मिग्रेशन कंपलीट होने के बाद भी उड़ान कंपनियों ने उन्हें एयरपोर्ट पर ही छोड़ दिया है और एयर लाइन स्टाफ भाग गया, यात्रियों की मदद के लिए कोई मौजूद नहीं है. एयरपोर्ट पर फंसे भारतीयों में डर का महौल है, क्योंकि बाहर अफरा-तफरी मची हुई है.। नेपाल की स्थिति पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम कल से नेपाल में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और कई युवाओं की जान जाने से बेहद दुखी हैं. हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं. हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना करते हैं.”
साथ ही भारत ने नेपाल के हालातों को शांतिपूर्वक हल होने की उम्मीद जताई है. इसके अलावा नेपाल में भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने और नेपाली प्राधिकारियों द्वारा जारी कदमों और दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.